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RSCIT Book Lesson- 1: What is Computer In Hindi Language | RSCIT Notes In Hindi

Chapter1- Computer Classification | Use of Computer | Computer Generation

What is Computer In Hindi Language | RSCIT Notes In Hindi #1 :-

इस RSCIT Notes की Post में हम बात करेंगें What Is Computer वो भी हिंदी भाषा में, और इसके साथ-साथ हम कंप्यूटर की परिभाषा  और कंप्यूटर के सामान्य भाग और उनका संक्षिप्त विवरण भी पढेंगे।

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" Computer शब्द उत्पति लैटिन भाषा के Compute शब्द से हुई हैं, जिसका अर्थ हैं गणना करना "

Definition :- "Computer एक Electronic सयंत्र हैं, जो संख्यात्मक या तार्किक आंकड़ों को तीव्र गति से, सटीकता के साथ संचित, नियंत्रित एवं संसाधित कर सकता हैं।"

इसी कारण से Computer को गणना करने वाली मशीन माना गया हैं। परन्तु आधुनिक युग में इसका कार्य क्षेत्र काफी विस्तृत और व्यापक हो गया हैं इसलिए हम इसे 'संगणक' या 'अभिकलित्र' भी कह सकते हैं।

वर्तमान युग में Computer ने सीखने की प्रक्रिया को भी बढ़ाया हैं। Students Class में ही नहीं बल्कि जब वह यात्रा कर रहा हैं, या PC (Personal Computer) के साथ House पर बैठ कर भी पढ़ सकता हैं।

Internet Technology से हर व्यक्ति के दरवाजे पर सभी जानकारी लाना संभव हुआ हैं। लोग अब पूछताछ, बैंकिंग, शॉपिंग, और कई और अधिक कार्यों के लिए Computer का उपयोग कर रहे हैं।

अब हम सूचना Super Highway के एक युग से गुजर रहे हैं जहां सभी प्रकार की Information सिर्फ Computer के एक Button पर Click करके उपलब्ध की जा सकती हैं।

आइये वर्तमान कंप्यूटर पर एक नजर डालते हैं।

इसमें निम्न Parts होते हैं -

1. CPU - यह Computer का Brain कहलाता हैं।
2. Monitor - Computer पर Display का कार्य Monitor के द्वारा किया जाता हैं, Monitor कई प्रकार होते हैं। जैसे - LDC Monitor, LED Monitor, VDU Monitor.
3. Keyboard - यह Computer में डाटा जैसे Text, Command etc. करवाने के लिए एक Input Device होता हैं
4. Mouse - यह एक Pointing Input Device होता हैं जिसके कारण हम कंप्यूटर को आसानी से चला सकते हैं
Normal Computers में ऊपर दिए गए चार Parts होने आवश्यक हैं।
और भी बहुत सारे Parts हम Computer के साथ जोड़ सकते हैं, जैसे - Printer, Speaker, Scanner Etc.

आपको ये RSCIT Book Lesson Notes In Hindi कैसे लगे। अगर आप RSCIT Book के Other Lessons के Notes पढ़ना चाहते हैं तो, हम RSCIT Book के सभी Lessons के नोट्स आपको प्रदान करेंगे।

1.1 Computer Classification | कंप्यूटर वर्गीकरण | RSCIT Notes In Hindi :


Computer Classification
1. Classification based on Operating Principles.
2. Classification Digital Computer based on size and Storage Capacity and Performance.

1. Classification based on Operating Principles:- 
 इस प्रकार के कम्प्यूटरों को तीन भागों में बांटा गया हैं।-
A. Analog Computer: ये कंप्यूटर दवाब, ताप आदि के अनुसार कार्य करते हैं। ये कंप्यूटर डॉक्टर्स के पास होते हैं। 
B. Digital Computer: ये कंप्यूटर अंको के आधार पर कार्य करते हैं। ये कंप्यूटर व्यवसाय, घर आदि में काम में लिए जाते हैं। 
C. Hybrid Computer: ये कंप्यूटर Analog और Digital दोनों कंप्यूटर के द्वारा किये जाने वाले काम करते हैं। 

2. Classification Digital Computer based on size and Storage Capacity and Performance:-
इस प्रकार के कम्प्यूटरों को चार भागों में बांटा गया हैं।- (Digital Computer)
A. Super Computer : इनकी भंडारण क्षमता, डेटा प्रोसेसिंग इत्यादि बहुत ज्यादा तेज होती हैं। इनका उपयोग वैज्ञानिकों द्वारा किया जाता हैं। 
पहला सुपर कंप्यूटर 1964 में बनाया गया।
इसका नाम - CDC 6600 था। 

Super Computer के उपयोग :
मौसम की भविष्यवाणी 
भूकंप की जानकारी 
और संचार इत्यादि। 

हथियारों के परीक्षण और नाभिकीय हथियारों के प्रभावों को जानने वाले कंप्यूटर -
IBM's Sequoia (अमेरिका में)
Fujitsu's K Computer (जापान में)
PARAM Super Computer (भारत में)

B. Mainframe Computer :  काफी महंगे और सरकारी संस्थाओ और बिज़्नेस ऑपरेशन के लिए होते हैं। ये कंप्यूटर बड़े कमरे में रखे जाते हैं। और इनको उचित शीतलन के साथ साथ कुछ और भी चाहिए होता हैं। ये बहुत तेज होते हैं। इनका उपयोग शिक्षण संस्थान और इंश्योरेंस कंपनियों में उनके ग्राहकों के डाटा को रखने के लिए किया जाता है। 
कुछ मशहूर मेनफ्रेम कम्प्यूटर्स -
Fujitsu's ICL VME
Hitachi's Z800

C. Mini Computer :  ये कंप्यूटर छोटे व्यवसाय में उपयोग में लिए जाते हैं। ये सुपर कंप्यूटर जितना शक्तिशाली नहीं होते पर फिर भी ये एक शक्तिशाली मशीन की गिनती में आते हैं।
कुछ मिनी कम्प्यूटर्स के नाम -
K-202
Texas Instrument TI-990
SDS-92

D. Micro Computer :
नार्मल हम अपने आसपास माइक्रो कंप्यूटर ही देखते हैं। और ये काफी अच्छे भी होते हैं।
ये कंप्यूटर 4 प्रकार के होते हैं-
Desktop Computer
Laptop Computer
Tablet PC
Handheld (Smartphone)

1.4 Use of Computer :
कंप्यूटर आज लगभग सभी क्षेत्रों में जैसे- शिक्षा, चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशासन, परिवहन, रेलवे, रोडवेज, संचार, व्यापार, मनोरंजन, घर, अस्पतालों आदि में इस्तेमाल किया जा रहा है।

यहां हम निम्नलिखित टॉपिक पर बात करने वाले हैं -

1. घरों में कंप्यूटर का उपयोग 
2. शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग
3. कंप्यूटर का व्यवसाय में उपयोग 


1. घरों में कंप्यूटर का उपयोग :- 

A. स्कूली बच्चों के लिए होमवर्क (Homework for School Children) :
ऐसे बहुत सारे काम होते हैं जो कि स्कूली बच्चे आसानी से कर सकते हैं जैसे कि कोई डॉक्यूमेंट तैयार करना एक्सेल में वर्कशीट बनाना पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन तैयार करना आदि कार्य स्कूली बच्चे आसानी से कर सकते हैं कंप्यूटर के द्वारा अपने घर पर रहकर।

B. मनोरंजन (Entertainment) :
कंप्यूटर के उपयोग से हम मनोरंजन भी बहुत ही आसानी से कर सकते हैं जैसे फिल्में और वीडियो देखना संगीत सुनना कोई कंप्यूटर गेम खेलना या फिर लाइव स्ट्रीमिंग करना यह सारे काम आसानी से कर सकते हैं।

C. सामाजिक मीडिया (Social Media) :
लोग सामाजिक मीडिया उपकरणों का प्रयोग करते हैं जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, और गूगल प्लस आदि का हम उपयोग कर सकते हैं इनसे हम चैट कर सकते हैं और वीडियो चैट भी कर सकते हैं।
D. ज्ञान (Knowledge) :
हम अपना ज्ञान इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे बढ़ा सकते हैं जेसे इंटरनेट पर बहुत सारी वेबसाइट उपलब्ध होती हैं जिनमें हम बुक्स वगैरह पढ़ सकते हैं और उन बुक्स को डाउनलोड भी कर सकते हैं तो इस प्रकार हम अपना ज्ञान घर बैठे बढ़ा सकते हैं।

2. शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग :- 

A. स्मार्ट क्लास (Smart Classes) :
आज परंपरागत कक्षाओं को आधुनिक स्मार्ट कक्षाओं में परिवर्तित किया जा रहा है जिसकी हमारी जो कक्षाएं होती है उसके अंदर एनिमेशन, वीडियो, चित्र आदि का उपयोग किया जा रहा है जिसके कारण विद्यार्थियों के लंबे समय तक याद भी रहता है और भी बहुत सारी गतिविधियां है जिनसे हमारी क्लास को स्मार्ट बनाने में कंप्यूटर की अहम भूमिका है।
B. ऑनलाइन शिक्षा (Online Education) :
पहले अगर गांव का विद्यार्थी शहर पढ़ने जाता था तो उसे बहुत ही मुश्किल होती थी और उसका बहुत सारा पैसा बर्बाद होता था पर वर्तमान में ऐसा नहीं है वर्तमान के में आप अपने कंप्यूटर और एक इंटरनेट कनेक्शन के माध्यम से इंटरनेट के द्वारा ऑनलाइन कोई भी कोर्स अपने घर बैठे कर सकते हो।
C. डिजिटल लाइब्रेरी (Digital Library) :
कंप्यूटर के आने से हमारी जो लाइब्रेरी थी जिसके अंदर बहुत सारी किताबें पढ़ी रहती थी अब वो लिब्रेरी पूरी की पूरी डिजिटल हो चुकी है अगर आपको कोई भी बुक्स चाहिए तो आपको इंटरनेट के माध्यम से बहुत ही आसानी से मिल जाती है।
D. अनुसंधान / परियोजनाएं (Research/Projects) :
विद्यार्थी कंप्यूटर के माध्यम से आपने प्रोजेक्ट को आसानी से बना सकता है यानी कि इंटरनेट के होने से उसे किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होती।

3. कंप्यूटर का व्यवसाय में उपयोग :-

A. संचार (Communication): 
 इंटरनेट के आने से हमारे व्यवसाय के अंदर संचार बहुत ही आसानी से होने लगा है जेस की ईमेल भेजना, SMS भेजना, गूगल हैंगआउट का यूज करना वीडियो कॉल करना यह सभी कार्य होने के कारण हमारे व्यवसाय और भी आसान हो चुका है।
B. बिक्री एवं विपणन (Sales And Marketing) :
पहले व्यवसाय के अंदर अगर किसी को सेल्स और मार्केटिंग करनी होती थी तो वह ऑफलाइन तरीकों को यूज करता था जो कि बहुत ही महंगे होते थे, वे अखबार या फिर दीवारों पर पोस्टर लगाकर अपने सामान की मार्केटिंग करते होते थे और दोस्तों वर्तमान में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वर्तमान के अंदर आप ऑनलाइन मार्केटिंग कर सकते हो जिसे कि डिजिटल मार्केटिंग के नाम से भी जाना जाता है और यह ऑफलाइन मार्केटिंग से भी सस्ती होती है और इसके माध्यम से हम अपने सामान को आसानी से सेल कर सकते हैं विज्ञापनों के द्वारा ऑनलाइन विज्ञापनों के द्वारा।
C. मानव संसाधन (Human Resource) :
 आमतौर पर किसी कंपनी का वित्तीय डाटा संभालने के लिए पहले मनुष्य के द्वारा यह कार्य किया जाता था पर वर्तमान के अंदर ऐसा नहीं है वर्तमान के अंदर कंप्यूटरीकृत बहुत सारे सॉफ्टवेयर होते हैं जो कि फाइनेंस वगैरह को मैनेज करते हैं।
D. शिक्षा और प्रशिक्षण (Education And Training) :
शिक्षा और प्रशिक्षण अगर किसी कंपनी को अपने कर्मचारियों के साथ मीटिंग करनी होती है तो वह बहुत ही आसानी से इंटरनेट के द्वारा कर सकती हैं इसी प्रकार ilearn यानी की शिक्षा भी ऑनलाइन होने लगी है और यह दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है।

Computer Generation In Hindi Language | कंप्यूटर की पीढ़ियां | RSCIT Notes In Hindi #2 -:

आज RSCIT Notes In Hindi #2 में हम बात करेंगे कंप्यूटर की पीढ़ियों के बारे में, Computer Generation में हम कंप्यूटर की पाँच पीढ़ियों के बारे अच्छे से Complete with Images पढ़ेंगें ताकि आपको बार बार Computer Generation को Read न करना पड़े आपको एक बार में ही अच्छे से समझ में आ जाये।
Computer Generation in Hindi 2020
Dosto शुरुआत में Computer बहुत बड़े-बड़े होते थे। जैसा कम्प्टूयर आज दखाई देता हैं। ऐसा पहले नहीं होता था। पहले के Computers बड़े होने के कारण उनको एक बड़े कमरे में रखा जाता था। जेसे-जैसे समय गुजरता गया। Computer का आकार भी समय के साथ छोटा होता गया।

तो चलिए जानते हैं कंप्यूटर की पाँच पीढ़ियों के बारे में -


1. प्रथम पीढ़ी (1942 से 1956 तक) :-

  • पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में इलेक्ट्रॉनिक घटक के रूप में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum tube) और डेटा भंडारण के लिए चुंबकीय ड्रम (Magnetic drum) का उपयोग होता था।
Vacuum tube
Vacuum tube
Magnetic drum
Magnetic drum
  • इन कंप्यूटर का आकर काफी बड़ा होता था जिसके कारण इनको एक बड़े कमरे की आवश्यकता होती थी।
  • ये कंप्यूटर बहुत महंगे होते थे
  • ये कंप्यूटर बहुत ज्यादा मात्रा में गर्मी पैदा करते थे जिसके कारण इनको ठंडा करना पड़ता था।
  • इन कम्प्यूटर्स का रखरखाव बहुत महंगा होता था।
  • पहली पीढ़ी के कम्पूटरो को Operate करने के लिए Machine Language का उपयोग Programing Language के रूप में किया जाता था।
  • इन कम्प्यूटर्स को Input, Panch Card और कागज टेप के माध्यम से किया जाता था।
  • Panch Card
    Panch Card
  • ये Computer एक समय में केवल एक समस्या का ही समाधान कर सकते थे।

2. दूसरी पीढ़ी (1956 से 1965 तक) :-

  • दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में इलेक्ट्रॉनिक घटक के रूप में ट्रांजिस्टर (Transistor) का उपयोग किया जाने लगा। Transistor अधिक कुशल, तेज, कम बिजली की खपत और प्रथम पीढ़ी में उपयोग होने वाली वैक्यूम ट्यूब से सस्ते और विश्वसनीय थे।
    Transistor
    Transistor
  • ये कंप्यूटर भी बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करते थे, परन्तु ये अधिक विश्वसनीय भी थे।
  • इस पीढ़ी में चुंबकीय टेप (Magnetic Tap) एवं चुंबकीय डिस्क (Magnetic disk) को सेकण्डरी भंडारण उपकरणों (Secondary storage devices) के रूप में उपयोग में लिया जाने लगा था।
  • इस पीढ़ी में उच्च स्तरीय कंप्यूटर प्रोगरामिंग भाषा में कॉबोल और फोरट्रान (Cobol and Fortran) की शुरुआत की गई। 

3. तीसरी पीढ़ी (1965 से 1975 तक) :-

  • तीसरी पीढ़ी में Transistor के स्थान पर IC (इंटीग्रेटेड सर्किट) का उपयोग होने लगा।
  • एक IC (Integrated Circuit) चिप में हजारो Transistor को सम्म्लित किया जाने लगा जिसके कारण Computer का आकार और भी छोटा हो गया।
    Integrated Circuit
    Integrated Circuit
  • इस पीढ़ी के कम्पूटरो में डाटा Input/Output करवाने के लिए Keyboard और Monitor का उपयोग किया जाने लगा।
  • Operating System की अवधारणा भी इसी पीढ़ी में शुरू की गई।
  • इसी पीढ़ी में Time Sharing और Multi programing Operating System को पेश किया गया।
  • तीसरी पीढ़ी की कई उच्च स्तरीय Programing Language - फोरट्रान, पास्कल, Basic इत्यादि।

4. चतुर्थ पीढ़ी (1975 से 1988 तक) :-

  • इस पीढ़ी में Microprocessor की शुरुआत की गई, जिसमे हजारो IC Chip एक सिलिकॉन चिप पर निर्मित किये जाने लगे।
    Microprocessor
    Microprocessor
  • आपको बता दें की Microprocessor Chip सिलिकॉन का बना होता हैं।
  • इस पीढ़ी में VLSI (Very Large-Scale Integration) तकनीक का उपयोग किया गया।
  • इस पीढ़ी कंप्यूटर का आकार बहुत ज्यादा छोटा हो चूका था
  • इस पीढ़ी में Time Sharing, Real Time Processing, Distributed Operating System का इस्तेमाल किया जाने लगा था।
  • इस पीढ़ी में नई उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा - C, C++ इत्यादि का इस्तेमाल किया गया। 

5. पंचम पीढ़ी (1988 से अब तक) :- (www.iLearnRSCIT.in)

  • इस पीढ़ी एक नई तकनीक उभर कर आई हैं जिसे ULSI (अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन) कहा जाता हैं, जिसमे 10 लाख Microprocessor Chips को शामिल किया जा सकता हैं।
  • इस पीढ़ी में कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence) और Voice Recognition, मोबाइल संचार, सेटेलाइट संचार , सिग्नल डाटा प्रोसेसिंग को शुरू किया गया हैं।
  • इस पीढ़ी की उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा - JAVA, VB, .NET आदि हैं।
Benefits of Computer Systems :- आज हम Read करेंगे कंप्यूटर सिस्टम के लाभ, (Benefits of Computer Systems) जिसमे हम सुचना प्रणाली के घटक के साथ-साथ कंप्यूटर की विशेषताओं पर भी गोर करेंगें।

Benefits of Computer Systems | कंप्यूटर सिस्टम के लाभ | RSCIT Notes In Hindi #3

1. कंप्यूटर सिस्टम- परिभाषा :-

कंप्यूटर ऐसे उपकरणों से बने होते हैं, जो डेटा को Input करते हैं, प्रोसेस करते हैं और स्टोर करते हैं। आपको डेटा का तो पता ही होगा (Text, Images, Audio clips, videos Etc. डेटा होता हैं) कंप्यूटर में डेटा Input Devise ( Mouse, Keyboard, Etc. इनपुट उपकरणों के उदारहण हैं ) के द्वारा इनपुट किया जाता हैं और Computer Memory में स्टोर किया जाता हैं। 
कंप्यूटर सिस्टम में परिणाम Output Devises (Monitor, Printer, Plotter Etc. आउटपुट उपकरणों के उदारहण हैं ) के द्वारा दिखाया जाता हैं 
कंप्यूटर केवल विधुत सकेंतो को ही समझता हैं। 

कंप्यूटर एक सूचना प्रणाली (Information system) का हिस्सा हैं 
सूचना प्रणाली के पांच भाग हैं - डेटा, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, प्रोसीजर और लोग। 

पीपल (लोग) - कंप्यूटर के द्वारा लोग अधिक उत्पाद और प्रभावी बन सकते हैं।  जैसे- कुछ टाइम पहले लोग अपने हाथो से राशिद काटते थे, पैसो का लेनदेन भी By Hand ही होता था। परन्तु अब ऐसा नहीं होता हम ऑनलाइन ये सारा काम बहुत आसानी से कर सकते हैं। 

प्रोसीजर - प्रोसीजर नियमो, दिशा निर्देशों का एक समूह होता हैं जिनको पढ़कर हम कंप्यूटर हार्डवेयर & सॉफ्टवेयर का आसानी से प्रयोग कर सकते हैं। जैसे - हमें MsWord सीखने के लिए या तो Youtube पर videos Watch करनी होगी या कोई Book Read करनी होगी। 

हार्डवेयर - ये वे उपकरण होते हैं जो कंप्यूटर में डेटा को इनपुट करवाने में हमारी मदद करते हैं। हार्डवेयर सॉफ्टवेयर द्वारा नियंत्रित किये जाते हैं। 

सॉफ्टवेयर - ये वे उपकरण होते हैं , जो कंप्यूटर को निर्देश देने में हमारी मदद करते हैं की कंप्यूटर को क्या काम करना हैं। प्रोग्राम्स का समूह या फिर प्रोग्राम्स का दूसरा नाम Software कहलाता हैं। 

डेटा - जो जानकारी किसी के साथ शेयर नहीं की गई वो डेटा होती हैं (डेटा- Image, Songs, कोई New Book) 
जैसे - हम कोई भी जानकारी इकट्ठा करते हैं तो वो डेटा होती हैं और जब हम उस डेटा तो कहीं परदर्शी करते हैं तो वो डेटा सूचना में बदल जाता हैं। 

2. कंप्यूटर की विशेषताएं :- 

1. गति (speed) - कम्प्यूटर की स्पीड बहुत जी ज्यादा होती हैं। कंप्यूटर डेटा की एक बड़ी मात्रा को Process करने में कुछ ही सेकण्ड्स का टाइम लेता हैं। 

2. शुद्धता (Accuracy) - कंप्यूटर के द्वारा दिए जाने वाले परिणाम हमेशा सही होते हैं। यदि कंप्यूटर में सही डेटा दर्ज किया गया हैं तो प्राप्त परिणाम भी एक दम सटीक होगा। 
Computer GIGO (Garbage in Garbage Out) के सिद्धांत पर कार्य करता हैं, अर्थात जो हमने कंप्यूटर में फीड किया हैं उसी तरह हमे परिणाम मिलेगा। जैसे हमने कंप्यूटर में 4 + 4 = 9 डेटा फीड किया हैं तो कंप्यूटर उसे 8 नहीं show कर सकता क्योंकि Computer में जो डेटा फीड होता हैं वह उसी के According परिणाम देता हैं। 

3. उच्च संचयन क्षमता (High Storage Capacity) - कंप्यूटर की Memory बहुत विशाल होती हैं। और हम इसमें बहुत बड़ी मात्रा में डेटा को Store कर सकते हैं।  इसमें कोई भी जानकारी लम्बे समय तक सुरक्षित रह सकती हैं।   

4. विविधता - कंप्यूटर किसी एक काम को करने के लिए नहीं बना हैं। इससे हम बहुत सरे काम कर सकते हैं। जैसे - बैंकिंग, अस्पताल प्रबंधन, पत्र लिखने और भी बहुत सरे काम हम कंप्यूटर के द्वारा कर सकते हैं। 

5. परिशंसीलता (diligence ) - एक मशीन होने के नाते कंप्यूटर को कभी भी थकान नहीं होती। कंप्यूटर को अगर हम कितना भी काम करवा ले ये शुरू से अंत तक उस काम को उतनी स्पीड में करेगा जितनी स्पीड में करना शुरू किया था। 

6. सिमा (Limitation) - जी हाँ कंप्यूटर की भी कुछ सीमाएं हैं।  कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन हैं जो की डाटा को ग्रहण करता हैं और परिणाम देता हैं पर ये अपने आप कोई भी काम नहीं कर सकता। ये खुद सोच नहीं सकता इसका IQ (Intelligent Quotient) लेवल 0 होता हैं।

Computer Hardware And Software In Hindi :- आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे Computer Hardware and Software Notes in Hindi के बारे में, ये Notes RSCIT की Official बुक में से आपके लिए बनाये गए हैं।
RSCIT Notes में आज हम Computer Hardware And Software In Hindi, जिसमे हम हार्डवेयर के दो भागों (Input & Output) के साथ-साथ सॉफ्टवेयर में Operating System, System Software, Application Software Etc. के बारे में में पढ़ेंगे।.

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Computer Hardware And Software In Hindi | कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर | RSCIT Notes In Hindi #4


1. कंप्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware) :-
 कंप्यूटर के वे भाग जिनका भौतिक स्वरूप होता हैं, उनको हार्डवेयर कहा जाता हैं अगर सामान्य भाषा में बोलें तो कंप्यूटर के वे भाग जिनको हम देख व छू सकते हैं। हार्डवेयर कहलाते हैं। 
Example - Monitor, CUP, Keyboard, Mouse, Printer, Scanner आदि के आलावा भी बहुत सारे Computer Hardware होते हैं, जिनका वर्णन आपको Next Post में मिलेगा।

Computer Hardware को चार भागो में बांटा गया हैं-
  • इनपुट डिवाइस (Input Device)
  • आउटपुट डिवाइस  (Output Device)
  • प्रोसेसिंग डिवाइस ( Processing Device)
  • स्टोरेज डिवाइस (Storage Device)

इनपुट डिवाइस (Input Device) :-
➭ वे उपकरण जो कंप्यूटर में डेटा को इनपुट करवाते हैं। इनपुट उपकरण कहलाते हैं।
➭ Keyboard, Mouse, Scanner, Web cam, Microphone, Joystick, Touch pad, Trackball Etc. इनपुट डिवाइस के उदारण हैं।
➭ इनपुट डिवाइस Information को Electrical Signal में Convert करते हैं।
➭ इनपुट उपकरणों का मुख्य कार्य मनुष्य को कंप्यूटर के साथ Interaction (बातचीत) करवाना होता हैं।

आउटपुट डिवाइस (Output Device) :-
➭ ये उपकरण कंप्यूटर सिस्टम से इनफार्मेशन लेते हैं और उसे ऐसे रूप में परिवर्तित कर देते हैं जिसे मनुष्य आसानी से समझ सकता हैं। उदाहरण - Printer द्वारा कंप्यूटर में स्टोर किसी  Document को Print करना ताकि कोई भी इंसान उसे आसानी से समझ सके।
➭ Monitor, Printer, Headphone, Speaker, Touchscreen, Projector Etc. आउटपुट डिवाइस के उदारण हैं।

प्रोसेसिंग डिवाइस ( Processing Device) :-
➭ ये उपकरण कंप्यूटर के भीतर इनफार्मेशन की प्रोसेसिंग करते हैं।
➭ Motherboard, Processor, Memory. प्रोसेसिंग डिवाइस के उदारण हैं।

स्टोरेज डिवाइस (Storage Device) :-
➭ ये उपकरण कंप्यूटर भीतर डेटा Store करने का कार्य करते हैं।
➭ Hard Disk Drive, Compact Disk Drive इसके उदारण हैं।

2. कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software) :-
➭ हम सॉफ्टवेयर के द्वारा बहुत से कार्य कर सकते हैं
➭ कंप्यूटर में सभी कार्य सॉफ्टवेयर के द्वारा किये जाते हैं जो की Secondary Memory में स्टोर हो जाते हैं।
➭ सॉफ्टवेयर प्रोग्राम्स का ही दूसरा नाम होता हैं।
➭ अलग-अलग सॉफ्टवेयर अलग-अलग कार्य के लिए बनाये जाते हैं जो की एक विशेष Programming Language में लिखे होते हैं।

Computer Software को दो भागो में बांटा गया हैं-
  • 1. सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) (चार भाग)
    • ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)
    • सिस्टम यूटिलिटीज (System Utilities)
    • डिवाइस ड्राइवर (Device Driver)
    • सर्वर (Server)
  • 2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) (दो भाग)
    • बेसिक एप्लीकेशन (Basic Applications) 
    • स्पेशलाइज्ड एप्लीकेशन (Specialized Applications)

सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) :-
➭ सिस्टम सॉफ्टवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर हैं जो पहले User से सूचना का आदान-प्रदान करता हैं और फिर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के साथ कार्य करता हैं। 
➭ सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के आंतरिक संसाधनों का प्रबधन करने में मदद करता हैं। 
➭ सिस्टम सॉफ्टवेयर एक प्रोग्राम नहीं बल्कि बहुत सारे प्रोग्रामों का एक संग्रह हैं। 

सिस्टम सॉफ्टवेयर के घटक निम्न हैं -
1. ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System):-
➭ ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर हैं जो कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का प्रबंधन करने के साथ-साथ कंप्यूटर प्रोग्रामो को सेवाएं प्रदान करता हैं। 
➭ ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर और User के बीच Interface प्रदान करता हैं।
➭ ऑपरेटिंग सिस्टम में Windows OS बहुत ज्यादा इस्तेमाल होने वाला OS हैं 
➭ लिनिक्स और यूनिक्स OS भी कुछ विशेष प्रकार की एप्लीकेशन में इस्तेमाल किया जाता हैं। ये कई प्रकार के होते हैं - एम्बेडेड (Embedded), वितरित (Distributed), वास्तविक समय (Real Time) अादि। 

2. सिस्टम यूटिलिटीज (System Utilities):-
➭ यूटिलिटी विंभिन्न प्रकार की सेवाएं हैं जो की ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा प्रदान की जाती हैं। 
कुछ यूटिलिटी सॉफ्टवेयर -
Disk Defragmenters: डिस्क डीफ़्रेग्मेंटर्स, ऐसे कंप्यूटर फाइलों का पता लगाते हैं जिनके कंटेंट हार्ड डिस्क पर कई लोकेशन में फैले हुए है, और एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए फ़्रेग्मेंट को एक ही लोकेशन पर ले जाते हैं।
Network Utilities: नेटवर्क युटिलिटीज कंप्यूटर नेटवर्क कि कनेक्टिविटी को एनलाइज़ करते है, नेटवर्क सेटिंग कॉन्फ़िगर करते है, डाटा ट्रांसफर या लॉग इवेंट्स चेक करते है।
Backup Software: बैकअप सॉफ्टवेयर डिस्क पर स्‍टोर सभी इनफॉर्मेशन की कॉपिज बनाता है और डेटा लॉस्‍ट होने पर इस बैकअप को रिस्‍टोर करने में मदद करते हैं।

3. डिवाइस ड्राइवर (Device Driver):-
➭ ये विशेष प्रोग्राम होते हैं जो की अन्य Input और Output Device को कंप्यूटर से जुड़ने में मदद करते हैं। 
जैसे - अगर आप एक नई प्रिंटर को कंप्यूटर से जोड़ रहे हैं तो आपको उस प्रिंटर के Device Driver करने होंगे, अन्यथा प्रिंटर Work नहीं करेगा। 

4. सर्वर (Server):-
➭ इसकी आवश्यकता तब होती हैं जब अलग-अलग User द्वारा किये गए अनुरोधों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रोग्रामों को रन करने की जरूरत होती हैं। 

5. लैंग्वेज ट्रांसलेटर (Language translator):- 
➭ ये भी सिस्टम सॉफ्टवेयर में ही काउंट होते हैं। 
➭  इसके द्वारा हम किसी लैंग्वेज को दूसरी लैंग्वेज में बदल सकते हैं जैसे- हिंदी को English में बदलना। 

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) :-
➭ एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर वो सॉफ्टवेयर हैं जो विशेष रूप से Users के लिए तैयार किये जाते हैं। 
➭ इनको End User Software भी कहा जाता हैं। 
➭ वर्ड प्रोसेसर, वेब ब्राउज़र, एक्सेल आदि इसी की श्रेणी में आते हैं। 

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को दो भागो में बनता गया हैं जो निम्न हैं -
1. बेसिक एप्लीकेशन (बेसिक Application):-
➭ इनका उपयोग अनेक कार्यो के लिए किया जाता हैं। जैसे - संदेश भेजने, डॉक्यूमेंट तैयार करने, डेटाबेस, ऑनलाइन शॉपिंग आदि। 
2. स्पेशलाइज्ड एप्लीकेशन (Specialized Applications):-
➭ ये प्रोग्राम कुछ विशेष कार्यों के लिए बने होते हैं। जो किसी व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करते हैं। 
➭ कुछ अच्छे प्रोग्राम्स -ग्राफिक्स, ऑडियो, वीडियो, मल्टीमीडिया, वेब लेखन और कृत्रिम बुद्धि। 

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हम आशा करते हैं की आप इस नोट्स को अपने RSCIT Friends के साथ जरूर शेयर करेंगे।

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